
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने यूरोपीय दौरे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना मिस्र के विवादित संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से करके खलबली मचाई है। उसी का परिणाम है कि संघ उन्हें आगामी 17 सितंबर से 19 सितंबर के बीच भारत के भविष्य पर होने वाले सम्मेलन में आमंत्रित करना चाहता है। हालांकि, अभी तक आमंत्रित नहीं किया गया है। इसी के साथ संघ के पदाधिकारी अरुण कुमार के उस बयान पर भी बहस शुरू हो गई है कि जो भारत को नहीं जानते, वे संघ को क्या समझेंगे। राहुल गांधी ने संघ की तुलना जिस संगठन से की है, वह भी लगभग उसी समय गठित हुआ था जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बना था। भारतीय राजनीति मिस्र की राजनीति से अलग है। भारत की प्राचीन परंपरा मिस्र की प्राचीन परंपरा से भिन्न रही है। इसे समझने और समझाने का प्रयास न तो किसी एक व्याख्यान में हो सकता है और न ही फेसबुक और व्हाट्सएप की बहसों में संभव है। टीवी चैनलों और विभिन्न संगठनों के विचारकों की तीखी बहसों में भी वह संभव नहीं है।
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