Saturday, September 1, 2018

लगातार ऊंची वृद्धि दर से ही आएंगे अच्छे दिन

अरविंद सुब्रह्मण्यम ने मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से विदा होते हुए जो कहा उससे हमारी शब्दावली में एक नया जुमला आ गया ‘कलंकित पूंजीवाद’। इससे उनका आशय यह था कि मुक्त बाजारों को अभी भी भारत में सुविधाजनक जगह नहीं मिली है। समस्या और भी गहरी है। कई भारतीयों ने बिना सोचे-समझे पश्चिम में उपजी सनक की तर्ज पर आर्थिक वृद्धि पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।

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