
विभिन्न दलों में लंबा राजनीतिक जीवन गुजार चुके सत्यपाल मलिक को जम्मू -कश्मीर का राज्यपाल बनाए जाने का निर्णय कुछ वैसा ही है जैसा 1985 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा अर्जुन सिंह को पंजाब का राज्यपाल बनाया जाना था। भले यह पूरे विश्वास से न कहा जा सके कि अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मोदी सरकार कश्मीर में पंजाब के राजीव-लोंगोवाल जैसा कोई समझौता करने में कामयाब होगी लेकिन, उस दिशा में प्रयास होगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता। कश्मीर में लंबे समय बाद किसी पूर्व राजनेता को राज्यपाल के पद पर बिठाया गया है।
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